Aur Ladki Jeet Gayi

Hindi, पेपरबैक Short Story by Satish Shukla

ISBN Number: 81-902781-3-4

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INR.300
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'और लड़की जीत गई ' ऐसी 18  मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह है, जो हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ीं हैं इनमें ऐसे पात्रों का चित्रण है , जिनसे हम रोज़ाना रूबरू होते हैं l इनके बिना ज़िन्दगी अधूरी लगती है ! रोज़ की आपा-धापी में जब इनकी अनदेखी हो जाती है तो  हम एक अहम्-पहलू जीने से वंचित हो जाते हैं l

         समाज में हमेशा ही  बाल, युवा, प्रौढ़ और वृद्धों की उपस्थिति रहती है, किन्तु इनके बीच संवादहीनता जीवन-धारा को शुष्क करने लगती है और जीवन नीरस होने लगता है l हमारे मन में पूर्वाग्रह और दुराग्रह डेरा जमा लेते हैं l प्रस्तुत कथा-संग्रह में शीर्षक-कथा ऐसे ही पूर्वाग्रह की ओर संकेत करती है lलाडली और शाइनी की अम्मा मन में करुणा का संचार  करतीं हैं ,तो वहीँ ये इन्सानी पाशविकता को भी उजागर करतीं हैं l  पेपर-वाला, कलक्टर-साब , डाक्टर-साब , साहब, बेरोज़गार , फोटो-वाला, सेवक, पुलिस-वाला, कलम-बाज़ आदि कथायें विभिन्न पेशों से जुड़ी बारीकियों को चुटीले-अंदाज़ में उकेरतीं हैं ! पचपन-साला ,मिश्राइन के जेठ ,मोनालिसा, सर्कस और सारंगी-वाला कथाओं की सहजता मन को भिगो जाती है l

        कहानियों की भाषा सरल हिंदी है...,दैनिक बोलचाल के शब्द कहानियों को जीवन्त बना देते हैं l शैली मनोरंजक और चुटीली है...कथायें पाठक को बाँधने में समर्थ हैं l

       इस कथा-संग्रह की कहानियाँ 'और लड़की जीत गई ' तथा 'डॉक्टर-साब ' आकाशवाणी के  देहरादून केन्द्र से प्रसारित हो चुकी है !!!

  • भाषा: हिन्दी
  • बंधन: पेपरबैक
  • प्रकाशक: कंडारी पब्लिशिंग हाउस (इंडिया )प्रा.लि.
  • लेखन -शैली: लघु-कहानियाँ
  • ISBN Number.: 81-902781-3-4
  • संस्करण: प्रथम पुनर्मुद्रण जुलाई2013
  • पृष्ठ: 152

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