आस-पास

Hindi, Hard Binding Short Story by Satish Shukla

ISBN Number: 978-81-86844-77-9

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INR.175
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सृष्टि में हर पल इतना-कुछ घटित होता रहता है कि हर-पल में कुछ-बात नज़र आती है इनमें से  कुछ तो इतनी गहन होतीं हैं कि ये मानस को झकझोर देती हैं l प्रस्तुत-कृति भी कुछ ऐसी-ही मार्मिक घटनाओं कि क़िस्सागोई है l कुछ अनुभूत-प्रसंगों को कलेवर दे दिया गया है l संग्रह की 12 कहानियाँ अलग-अलग रस में पगीं हैं l इनमें हमारे सुख-दुःख की दास्तान है l परिवेश यदि अनुकूल हो तो जीवन सुख का सागर लगता है अन्यथा दुःख का पहाड़ बन जाता है l चूँकि घटित को नकारना सम्भव नहीं होता अतः इन स्थितियों को स्वीकारना नियति बन जाती है l

        ' आस-पास ' की कहानियाँ हमारे आस-पास की हैं इनमें वृत्ति और प्रवृत्ति दोनों गुथीं हुई हैं कभी ये मन को गुद्गुदायेंगीं तो कभी आँखें गीली कर जायेंगीं...कभी सोचने पर मजबूर कर  देंगीं कि आख़िर हम कहाँ जा रहे हैं...! संसार में खाली-हाथ आने और खाली-हाथ जाने का सत्य क्यों समझ  नहीं आ रहा है...!!!

       संग्रह में शामिल कथाओं बहुरिया और गंगा-स्नान में यदि घरेलू अन्तरंगता हैं तो जिस्म ,बाबा कड़क नाथ और  पुष्पा-पागल इन्सानी-वहशियत उजागर करतीं हैं lयदि फेसबुकिया,विदेशी-कुत्ताचीफ-गेस्ट और सफारी की सैर हमें सकारात्मक-बोध करातीं है तो मास्साब और मिठाई आतंकवाद तथा लालच का घृणित चेहरा दिखातीं हैं l 

        'आस-पास ' की कथाओं में इन्हीं प्रश्नों को उकेरने का प्रयास किया गया है l आप पढ़कर स्वयं फ़ैसला कीजिये कि ये कितना क़रीब पहुँच सकीं ! कहानियों का परिवेश रेखा-चित्रों में दर्शित है l लेखक को आपकी राय की प्रतीक्षा रहेगी...!!! 

  • भाषा: हिन्दी
  • बंधन: पेपरबैक
  • प्रकाशक: विनसर पब्लिशिंग कम्पनी
  • लेखन -शैली: लघु-कहानियाँ
  • ISBN Number.: 978-81-86844-77-9
  • संस्करण: प्रथम, 2015
  • पृष्ठ: 168

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